जिंदगी में ऊंचाईयों को छूना है तो, मुश्किल से मुश्किल वक्त में डटे रहो- राहुल गुप्ता 0

 

कार्यक्रम का संदर्भ

तारीख 26 जून लाइक शेयर कमेंट का 28 वां संस्करण. लाइक शेयर कमेंट्स के पूरी टीम के साथ कंसोल ग्रुप के को-फाउंडर्स, सीईओ, कर्मचारियों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया अपने स्पेशल गेस्ट का..जो पूरे प्रदेश के  साथ देश में जाने जाते हैं माउंटेन मैन के नाम से..और इस शख्स का नाम है राहुल गुप्ता..जिन्होंने हाल ही मे दुनिया की सबसे मुश्किल चोटियों में से एक माउंट एवरेस्ट में भारत का तिरंगा लहराया है..राहुल गुप्ता ने लगभग 20 कंसोलर्स के साथ अपने एवरेस्ट फतेह के अनुभवों और मुश्किलों को साझा किया..साथ ही कंसोल ग्रुप के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अपनी जिंदगी के सफर और लक्ष्य को बताया..

राहुल गुप्ता की सभा के मुख्य अंश

राहुल गुप्ता जिसे आज हर कोई जानता है..कल तक गुमनामी के अंधेरे में कहीं खोया हुआ था..राहुल गुप्ता ने बताया कि वो किस तरह से एक स्टूडेंट से माउंटेन मैन बने..राहुल ने जो अनुभव साझा किए उसे सुनकर हर कोई हैरान था..स्कूल के समय राहुल गुप्ता को परिवार ने साइंस लेकर पढ़ाई करने को कहा लेकिन साइंस में असफल होने के बाद उन्होंने आर्ट्स से अपनी पढ़ाई पूरी की..लेकिन साइंस की असफलता ने जहां राहुल के परिजनों को अचंभे में डाला वहीं आर्ट्स लेकर पढ़ने के बाद जो रिजल्ट आया उससे परिवार समेत राहुल को जानने वाले भी हैरान थे..क्योंकि राहुल ने आर्ट्स में टॉप किया था..जिसकी वजह से उन्होंने पहला कदम उठाया और पढ़ाई के लिए दिल्ली की ओर रुख कर लिया..

जिंदगी का सबसे अहम मोड़

कॉलेज के दौरान राहुल को सबसे बड़ी मुश्किल तब आई जब उन्हें कोई एडवेंचर गेम में हिस्सा लेने को कहा गया….एनसीसी में जगह होने के कारण राहुल ने एनसीसी ज्वाइन की लेकिन वहां के रूल और मुश्किल शेड्यूल के कारण एनसीसी छोड़ दी..लिहाजा राहुल ने ट्रैकिंग सीखने का मन बनाया…लेकिन राहुल ट्रैकिंग के लिए किसी दूसरे कॉलेज में आवेदन करना पड़ा..जहां से राहुल को इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया क्योंकि वो आउटसाइडर थे..इस वाक्ये ने राहुल को अंदर से हिला दिया उन्होंने सोचा क्यों न अपने ही कॉलेज में ट्रैकिंग कोर्स शुरु किया जाए जो कि काफी पहले बंद हो चुका था..इसके लिए राहुल ने दोबारा एनसीसी ज्वाइन की और मेजर से रिक्वेस्ट की वो उन्हें माउंटेनियर बनने में मदद करें..मेजर मान गए और शुरु हुआ राहुल का सफर..राहुल ने गूगल से जानकारी जुटाई और ट्रैकिंग करने वाले एक इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया..राहुल ने मन में संकल्प लिया कि वो एक दिन एवरेस्ट फतेह करेंगे.. इसके बाद राहुल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.. राहुल के अपने सफर के दौर कई मुश्किलो का सामना करना पड़ा..ट्रैकिंग के लिए वो गाइड बनें, एक टाइम खाना खाया, विदेशी ट्रैकर्स के टूर गाइड बनकर उनके बर्तन साफ किए.,,राहुल ने इस दौरान भारत की कई मुश्किल चोटियों को कम समय में फतह किया.. राहुल को जब एवरेस्ट फतेह करने का मौका मिला तो उन्होंने न सिर्फ टीम लीडर की जिम्मेदारी निभाई बल्कि मुश्किल औऱ कठिन परिस्थितियों में अपनी टीम के साथ वापस भी लौटे..अब राहुल का सपना 7 समिट करने का है..राहुल ने एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी करने के बाद मन में सोचा है कि हमेशा

लाइक शेयर कमेंट सेशन के बाद प्रतिक्रिया

राहुल गुप्ता के सेशन को हर किसी ने ध्यान से सुना..और जाना कि किस तरह से कोई भी काम मुश्किल नहीं होता…बस मन में उसे पूरा करने की आग जलनी जरूरी है..इस सेशन का समापन फोटो सेशन के साथ हुआ.जिसमे कंसोलर्स के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भी शामिल हुए..

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