“ कभी भी हार नहीं माननी चाहिए” : वैभव अल्शी 0

हैलो दोस्तों, मेरा नाम है वैभव अल्शी, इससे पहले आप कुछ और पूछे मैं बता देता हूँ कि अल्शी मतलब आलसी होता है, तो अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मैं कैसा हूँ” – कुछ इन्ही अल्फाज़ों के साथ लाइक शेयर कमेंट के 24 वें अध्याय में अपनी उपस्थिति प्रदान करने वाले अदानी ग्रुप के काॅर्पोरेट अफेयर्स हेड श्री वैभव अल्शी ने अपना परिचय देकर हमें अनुग्रहित किया.

वैभव जितने सीधे हैं उतने ही विचारों से भी सुलझे हुए व्यक्ति हैं. अपने बचपन का किस्सा बताते हुए वैभव ने हमसे शेयर किया कि कैसे उन्हें बचपन में अपने पिता की दुकान पर बैठना और पुड़िया बांधना बिल्कुल भी गवारा नहीं था.

वैभव आगे बताते हैं कि महाराष्ट्र के जिस गांव में वो जन्मे थे वहां दसवीं कक्षा के बाद स्कूल नहीं था इसलिए उन्हें घर से निकलकर आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए ठाणे आना पड़ा. वैभव अल्शी ने अपनी पढ़ाई एक केमिकल इंजीनियर के तौर पर पूरी करी.

वैभव ने एक तरफ जहाँ अपनी बातों से सारे लोगों का मन मोह लिया था वहीं उनके कुछ विचार काफी प्रेरणात्मक साबित हुए. वैभव ने अपने जीवन के अनुभव को बताते हुए यह सीख दी की कभी हार नहीं माननी चाहिए. उन्होंने बताया कि किस तरह एक टीम को सफलतापूर्वक संभाला जाता है.

वैभव अल्शी के साथ समय कुछ ऐसे गुज़र गया जैसे मोदी जी के शासन के चार साल. देखते-देखते 2 घंटे बीत गए लेकिन बैठे हुए लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी . हैरानी तो खुद वैभव को हुई जब उन्होंने अपनी घड़ी देखी.

वैभव आज सफलता के जिस मुकाम पर हैं वहाँ आकर इंसान अक्सर अपने अस्तित्व, अपने पहनावे, अपने रहन-सहन में बदलाव कर बैठता है लेकिन वैभव को देखकर ये कोई नहीं कह सकता की उन्हें किसी भी चीज़ का घमंड है. वैभव जैसी उच्च सोच वाले व्यक्ति आजकल कम ही देखने मिलते हैं. उनके साथ बिताया हर पल प्रेरणादायक था. जाते-जाते वैभव ने कंसोल ग्रुप के काम को सराहते हुए कहा कि “कंसोल ग्रुप भारत में स्टार्ट अप कंपनियों के लिए मिसाल बन सकता है”.

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